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मौन निमंत्रण

  स्तब्ध-ज्योत्सना में जब संसार चकित रहता शिशु सा नादान, विश्‍व के पलकों पर सुकुमार विचरते हैं जब स्वप्न अजान; न जाने, नक्षत्रों से कौन निमंत्रण देता मुझको मौन! सघन मेघों का भीमाकाश गरजता है तब तमसाकार, दीर्घ भरता समीर निः श्‍वास प्रखर झरती जब पावस धार न जाने, तपक तडित में कौन मुझे इंगित करता तब कौन देख वसुधा का यौवन भार गूंज उठता है जब मधुमास विधुर उर के से मृदु उद्‌गार कुसुम जब खुल पड़ते सोच्छ्वास ना जाने सौरभ के मिस कौन संदेशा मुझे भेजता मौन! ना जाने कौन; अये छविमान जान मुझको अबोध, अज्ञान, सुझाते हो तुम पथ अनजान, फूंक देते छिन्दों में गान अहा सुख-दुख हा सहचर मौन! नहीं कह सकती तुम हो कौन! - सुमित्रा नंदन पंत
हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती लहरों से डरकर नैया पार नहीं होती नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है चडती दीवारों पर सौ बार फिसलती है मन का विश्‍वास रगों में साहस भरता है चढ़ कर गिरना, गिर कर चढ़ना न अखरता है आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती डुबकियां सिन्धु में गोताखोर लगाता है जा जा कर खाली हाथ लौट आता है मिलते ना सहज ही मोती पानी में बढ़ता दूना उत्साह इसी हैरानी में मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो क्या कमी रह गयी, देखो और सुधार करो जब तक ना सफल हो, नींद चैन से त्याग दो तुम संघर्ष करो मैदान छोड़ मत भागो तुम कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती - हरिवंश राय बच्चन